रसोई गैस की कीमतों में ₹60 का उछाल, क्या आगे और बढ़ेगी महंगाई?

By My Gas Connection

पश्चिम एशिया के उफान भरे हालातों ने भारतीय घरों की रसोई को महंगा कर दिया है। हाल ही में 14.2 किलो के घरेलू एलपीजी सिलेंडर की कीमत में 60 रुपये का इजाफा हो गया। दिल्ली जैसे बड़े शहरों में अब यह सिलेंडर 913 रुपये का हो चुका है। पिछले कई महीनों के बाद यह पहली बड़ी बढ़ोतरी है, जो आम परिवारों के लिए चिंता का विषय बन गई। साथ ही 19 किलो के कमर्शियल सिलेंडर के दाम भी 115 रुपये ऊपर चढ़कर 1883 से 1950 रुपये के दायरे में पहुंच गए।

रसोई गैस की कीमतों में ₹60 का उछाल, क्या आगे और बढ़ेगी महंगाई?

बढ़ोतरी की मुख्य वजहें

इस महंगाई का सबसे बड़ा कारण मध्य पूर्व में चल रहे तनावपूर्ण संघर्ष हैं। ईरान, इजरायल और अमेरिका के बीच बढ़ते विवाद ने वैश्विक कच्चे तेल व प्राकृतिक गैस के बाजारों में हड़कंप मचा दिया। भारत अपनी आधी से ज्यादा एलपीजी जरूरत आयात पर निर्भर है, इसलिए अंतरराष्ट्रीय बाजार की उथल-पुथल सीधे प्रभावित कर रही। तेल कंपनियों को मजबूरन घरेलू कीमतें समायोजित करनी पड़ीं। हालांकि स्टॉक पर्याप्त होने का दावा किया जा रहा, लेकिन सप्लाई चेन पर नजर बनी हुई। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर युद्ध जैसे हालात लंबे खिंचे तो हालात और बिगड़ सकते। कुछ इलाकों में कमर्शियल गैस की कमी की खबरें भी आ रही।

शहरों में नई कीमतें

मुंबई में घरेलू सिलेंडर करीब 920 रुपये, कोलकाता में 930 रुपये से अधिक और चेन्नई में 925 रुपये के आसपास बिक रहा। कमर्शियल सिलेंडर मुंबई में 1835, कोलकाता में 1900 और चेन्नई में 1950 रुपये तक महंगा हो गया। ये आंकड़े मध्यम वर्गीय परिवारों के लिए बोझ बन रहे, क्योंकि ज्यादातर घरों में एक सिलेंडर महीने भर चलता। गृहिणियां परेशान हैं कि पहले ही सब्जी दाल के दाम ऊंचे हैं, ऊपर से गैस का खर्च।

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परिवार व व्यापार पर असर

मध्यम वर्ग पर सबसे भारी पड़ रहा यह बोझ। होटल रेस्तरां उद्योग में कमर्शियल सिलेंडरों का भारी इस्तेमाल होता है, जिससे खाने पीने की चीजों के दामों में अप्रत्यक्ष बढ़ोतरी हो सकती। एक गृहिणी ने कहा कि बजट बिगड़ गया, अब हर महीने अतिरिक्त 60 रुपये का इंतजाम सोचना पड़ेगा। उद्योग संगठनों ने सरकार से सब्सिडी बढ़ाने की अपील की। उज्ज्वला योजना से गरीब महिलाओं को राहत मिली थी, लेकिन अब दबाव बढ़ा। विपक्ष ने विदेश नीति पर सवाल उठाए।

आगे की चुनौतियां

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अगर मध्य पूर्व का संकट नहीं सुलझा तो अगले महीनों में और वृद्धि संभव। आर्थिक सर्वे में मुद्रास्फीति 5.5 प्रतिशत बताई गई, जो इससे प्रभावित हो सकती। उपभोक्ता पाइप नेचुरल गैस या इंडक्शन जैसे विकल्प तलाश रहे। सरकार को तुरंत कदम उठाने होंगे वरना असंतोष फैल सकता। यह महंगाई केवल आंकड़े नहीं, बल्कि करोड़ों परिवारों का रोज का संघर्ष है। समय रहते समाधान जरूरी।

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