केंद्र सरकार ने रसोई गैस के वितरण में क्रांतिकारी कदम उठाया है। अब यदि आपके घर में पाइप नेचुरल गैस (PNG) का कनेक्शन है, तो एलपीजी सिलेंडर को पूरी तरह भूल जाना होगा। नया कनेक्शन लेना, पुराना रखना या रिफिल कराना सब कुछ प्रतिबंधित। यह बदलाव वैश्विक गैस संकट के बीच लागू किया गया है, ताकि संसाधनों का बेहतर उपयोग हो सके।

बदलाव का पूरा खुलासा
पेट्रोलियम मंत्रालय ने विशेष आदेश जारी कर स्पष्ट किया है। सरकारी तेल कंपनियां अब डेटाबेस के जरिए PNG उपयोगकर्ताओं की सूची तैयार करेंगी। ऐसे घरों को नया एलपीजी कनेक्शन नहीं मिलेगा। मौजूदा कनेक्शन 30 दिनों के अंदर सरेंडर करने होंगे। रिफिल बुकिंग स्वतः रद्द हो जाएगी और सब्सिडी भी बंद। देशभर में करोड़ों PNG कनेक्शन सक्रिय हैं, जबकि लाखों नए जुड़ने की संभावना है। शहरी क्षेत्रों में दोहरी व्यवस्था से गैस की बर्बादी रुक जाएगी। ग्रामीण इलाकों को अब प्राथमिकता मिलेगी।
वैश्विक संकट का असर
यह नीति अंतरराष्ट्रीय घटनाओं से प्रेरित है। पश्चिम एशिया में चल रहे तनाव से भारत का गैस आयात बुरी तरह प्रभावित हुआ है। पिछले वर्ष देश ने लाखों टन एलपीजी का उपयोग किया, जिसमें अधिकांश विदेशों से आया। सप्लाई चेन बाधित होने से स्टॉक कम हो गया। कालाबाजारी बढ़ी और उपभोक्ता परेशान। सरकार का उद्देश्य स्पष्ट है। PNG न केवल सस्ती है, बल्कि इससे कोई विस्फोट का खतरा भी नहीं। यह 24 घंटे उपलब्ध रहती है। कई शहरों में कंपनियां नए कनेक्शन पर मुफ्त सुविधाएं दे रही हैं।
उपभोक्ताओं पर व्यापक प्रभाव
शहरी परिवारों में हलचल मच गई है। मध्यम वर्ग को PNG की ओर तेजी से बढ़ना पड़ेगा। सब्सिडी का बोझ कम होने से वास्तविक जरूरतमंदों को लाभ। ग्रामीण क्षेत्रों में एलपीजी की उपलब्धता बढ़ेगी। पर्यावरण के लिहाज से भी सकारात्मक। कार्बन उत्सर्जन घटेगा और ऊर्जा सुरक्षा मजबूत होगी। आलोचना भी हो रही है। कुछ इसे जबरदस्ती मानते हैं, लेकिन समर्थक कहते हैं कि यह लंबे समय के लिए फायदेमंद साबित होगी।











