हमारा देश विश्वभर में LPG गैस को आयत करने के मामले में चौथे नंबर पर आता है और अब देशभर में LPG की डिमांड भी बढ़ती जा रही है। बीते दिनों से अमेरिका-इजराइल-ईरान में जारी टेंशन की वजह से हार्मूज जलडमरूमध्य को करीबन ठप सा ही कर रखा है। यहां से ही विश्वभर को लगभग 20% LNG की सप्लाई हो पाती है। इसी कारण भारत में भी गैस की सप्लाई पर प्रभाव पड़ा है।

भारत में नेचुरल गैस को बनाने का काम देश के विभिन्न भागों एवं सागरीय भागो में स्थिति कई सेडीमेंटरी बेसिन से होता है। किंतु काफी कम लोगो को यह पता होगा कि PNG गैस कहां से आ रही है? और क्या ये खत्म भी हो जायेगी। तो आज के आर्टिकल में आपको इसी बात की जानकारी देते है।
घरेलू गैस में खाड़ी देशों की निर्भरता
वैसे भारत में भी LPG गैस का प्रोडक्शन हो रहा है किंतु घरेलू गैस का बड़ा भाग आयात ही करना पड़ रहा है। 2024-25 में भी हमारे देश में LPG की कुल खपत 3.13 करोड़ टन हुई वही अपने देश में केवल 1.28 करोड़ टन का ही निर्माण हो पा रहा है। अब जरूरी सप्लाई की पूरी को खाड़ी के देशों से पूरी हो रही है। अब खाड़ी देशों का संघर्ष और सुमुर्दी मार्गो के रुकने से गैस की आपूर्ति रुकती है।
PNG सप्लाई से समाधान मिलेगा
अभी देशभर में LPG सिलेंडर की दिक्कत के बीच पाइपलाइन वाली PNG (पाइप नेचुरल गैस) एक सुरक्षित और 24 घंटे सप्लाई देने वाला ऑप्शन बन चुका है। इसी बीच सरकार के नए आदेश के मुताबिक, देश के जिन भागो में PNG की सप्लाई होगी तो वहां पर 3 माह के अंदर LPG सिलेंडर की सप्लाई को बंद कर सकते है। ऐसे ग्राहकों पर PNG गैस को यूज करने पर बल मिल रहा है।
PNG गैस निर्यातक देश
PNG गैस के बनने में मुख्य घटक मीथेन (CH4) गैस होती है जोकि खासतौर से नेचुरल गैस के कुंए से मिलती है। भारत को कुल जरूरत का 50 फीसदी नेचुरल गैस को घरेलू सोर्स से उत्पादित करते है। अब बची हुई मांग की पूर्ति को LNG ( लिक्विड नेचुरल गैस) को अमेरिका, रूस और ऑस्ट्रेलिया जैसे देश से आयत करते है। इनको GAIL और दूसरी गैस डिस्ट्रीब्यूशन कंपनियां पाइपलाइन नेटवर्क की मदद से डायरेक्ट घरों तक पहुंचाते है।
PNG गैस खत्म हो जाए तो!
वैसे तो PNG यानी पाइप्ड नेचुरल गैस के खत्म होने की संभावना है किंतु इसके खत्म होने की वजह LPG से अलग रहती है। ये गैस एक नेचुरल रिसोर्स होता है जोकि जमीन के नीचे से ही प्राप्त होती है। एक तय मात्रा में ही होने की वजह से नेचुरल गैस के रिजर्व समाप्त हो जाने से इसकी आपूर्ति बाधित हो जाएगी।
वैज्ञानिकों के मुताबिक, जैसे विश्वभर में PNG गैस की खपत हो रही है तो भविष्य के 50 से 60 सालो में इसके सोर्स में कमी देखने को मिलेगी। किंतु नई टेक्नोलॉजी के द्वारा वैसे स्थानों से भी गैसे निकलने लगी है जिसमे पहले तक संभव नहीं था जैसे कि शैल गैस।

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PNG के संभावित विकल्प भी
यदि नेचरल गैस के रिजर्व खत्म हो जाए तब भी लोगो को गैस की सप्लाई मिलेगी। वैज्ञानिकों ने बायोगैस और ग्रीन हाइड्रोजन को भी PNG वाले पाइपलाइन नेटवर्क से पहुंचाने की तैयारी कर दी है। कूड़े से निर्मित होने वाली बायोगैस को एक रेन्युएबल एनर्जी का सोर्स कहते है जोकि कभी खत्म नहीं होता।











