घरों की रसोई चलाने वाली लाखों महिलाओं के लिए केंद्र सरकार ने एलपीजी सिलेंडर बुकिंग के नियमों में सख्ती बरतने का फैसला किया है। पहले एक गैस सिलेंडर डिलीवर होने के 21 दिनों के अंदर ही अगला सिलेंडर बुक हो जाता था, लेकिन अब शहरों में कम से कम 25 दिनों का इंतजार करना पड़ेगा।
ग्रामीण इलाकों में यह अवधि 45 दिनों तक पहुंचा दी गई है। पेट्रोलियम मंत्रालय का कहना है कि वैश्विक स्तर पर ईंधन आपूर्ति में आई परेशानियों के कारण यह कदम उठाया गया है, ताकि स्टॉक का बेहतर प्रबंधन हो सके और हर परिवार तक गैस पहुंचे।

बदलाव की पूरी कहानी
पहले के नियम सरल थे। उपभोक्ता मोबाइल ऐप, वेबसाइट या डिस्ट्रीब्यूटर से संपर्क कर जल्दी बुकिंग कर लेते। इंटर-बुकिंग अंतराल 15 से 21 दिनों का होता, जो क्षेत्र के आधार पर बदलता रहता। अब सिस्टम खुद तय करेगा कि डिलीवरी कब हो। शहरों में 25 दिन की बाध्यता से मध्यम आकार के परिवारों को गैस का अधिक सतर्कता से उपयोग करना होगा। जहां मासिक खपत ज्यादा है, वहां यह नियम चुनौती बन सकता है। ग्रामीण क्षेत्रों में 45 दिनों का समय इसलिए रखा गया, क्योंकि वहां वितरण नेटवर्क सीमित है और मांग ज्यादा। विशेषज्ञों के अनुसार, मिडिल ईस्ट के तनाव ने वैश्विक एलपीजी सप्लाई को प्रभावित किया, जिसका सीधा असर भारत पर पड़ा।
जमाखोरी पर लगाम का दावा
सरकार का मुख्य उद्देश्य एक साथ कई सिलेंडर जमा करने वालों पर रोक लगाना है। कई लोग पुराने सिलेंडर घर पर रखे रहते और नए बुक कर लेते, जिससे कालाबाजारी को बल मिलता। नए नियम से सालाना सब्सिडी सीमा यथावत रहेगी, लेकिन बुकिंग की समय-सारिणी लंबी हो जाएगी। रिफाइनरियों को घरेलू उत्पादन तेज करने के निर्देश दिए गए हैं। प्राथमिकता रसोई, अस्पतालों और जरूरी सेवाओं को मिलेगी। कमर्शियल उपयोग पर अलग से विचार होगा। ऊर्जा विशेषज्ञों का मानना है कि यह अल्पकालिक उपाय है, लेकिन लंबे समय में आपूर्ति श्रृंखला मजबूत न हुई तो मुश्किलें बढ़ सकती हैं।
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आम आदमी पर पड़ेगा असर
उत्तराखंड जैसे पहाड़ी राज्य में रसोई गैस पर निर्भरता ज्यादा है। देहरादून की एक गृहिणी ने बताया कि उनका सिलेंडर 20 दिनों में खाली हो जाता, अब इंतजार लंबा होने से लकड़ी या कोयले पर लौटना पड़ सकता है। ग्रामीण महिलाओं के लिए 45 दिन का वक्त रसोई संकट पैदा करेगा। बुकिंग का तरीका वही रहेगा। आप भोपल गैस हेल्पलाइन, ऐप या व्हाट्सएप से बुक कर सकते हैं, लेकिन डिलीवरी में देरी होगी। उपभोक्ताओं से अपील है कि गैस बचाएं और अनावश्यक बुकिंग से बचें।
आगे की राह क्या?
यह नियम 8 मार्च से लागू हो चुका। सरकार इलेक्ट्रिक कुकिंग को बढ़ावा देने पर विचार कर रही है। फिलहाल उपभोक्ता जागरूक रहें। क्या यह कदम सही दिशा में है या बोझ बढ़ाएगा? बहस जारी रहेगी। अधिक जानकारी के लिए अपने डिस्ट्रीब्यूटर से बात करें।











