मध्य पूर्व के युद्ध ने भारत की रसोई को आगोश में ले लिया है। देशभर में LPG सिलेंडरों की भारी किल्लत से लाखों परिवार परेशान हैं। आगरा से लेकर मुंबई तक एजेंसियों पर सुबह से शाम तक लंबी-लंबी लाइनें लग रही हैं। लोग घंटों इंतजार कर रहे हैं, लेकिन कई खाली हाथ लौट रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि असली समस्या सप्लाई चेन में रुकावट तो है ही, लेकिन पैनिक बुकिंग ने हालात को और बिगाड़ दिया है।

युद्ध की आंच पहुंची घर-घर
स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज पर पड़ी रोक ने भारत के LPG आयात को बुरी तरह प्रभावित किया है। यह रास्ता देश के अधिकांश गैस सप्लाई का मुख्य द्वार है। जहाजों को लंबा चक्कर लगाना पड़ रहा है, जिससे न सिर्फ देरी हो रही बल्कि कीमतें भी आसमान छू रही हैं। हाल ही में घरेलू 14.2 किलो के सिलेंडर की कीमत 60 रुपये और 19 किलो के वाणिज्यिक सिलेंडर के दाम 115 रुपये बढ़ गए। इसका सबसे बुरा असर होटलों और रेस्तरां पर पड़ा है। कई शहरों में तीन दर्जन से ज्यादा प्रतिष्ठान बंद हो चुके हैं। आगरा के सरेंधी चौराहा जैसे इलाकों में तो हालात बेहद नाजुक हैं।
पैनिक ने बढ़ाई मुसीबत
सामान्य दिनों में रोजाना 50 से 55 लाख घरेलू बुकिंग होती हैं। लेकिन हाल के एक दिन में यह संख्या 88 लाख तक पहुंच गई। इतनी भारी भरकम मांग से मोबाइल ऐप्स और बुकिंग सिस्टम ठप हो गए। आगरा में रोजाना 16 हजार की बुकिंग अब 20 हजार के पार पहुंच चुकी है। वाणिज्यिक ग्राहक घरेलू सिलेंडरों पर टूट पड़े हैं, जिससे डिलीवरी में 25 से 36 घंटे की देरी हो रही है। बैकलॉग इतना बढ़ गया कि छोटे-छोटे रेस्तरां बंदी की कगार पर आ गए। अफवाहों का बाजार भी गर्म है। लोग डर के मारे एक साथ बुकिंग कर रहे हैं, जो संकट को और गहरा कर रहा है।
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सरकार अलर्ट मोड में
सरकार ने तुरंत कदम उठाए हैं। अब शहरी क्षेत्रों में 25 दिन से पहले और ग्रामीण इलाकों में 45 दिन से पहले रिफिल बुकिंग रद्द कर दी जाएगी। वाणिज्यिक डिलीवरी को प्राथमिकता दी जा रही है। स्टॉकिंग रोकने के लिए सख्त कानून लागू किए गए हैं। राज्यों से अपील की गई है कि पाइप नेचुरल गैस को बढ़ावा दें। डिजिटल बुकिंग को आसान बनाने के लिए एसएमएस, ऐप और व्हाट्सएप जैसी सुविधाओं पर जोर दिया जा रहा है। विशेषज्ञ समितियां गठित हो चुकी हैं, जो घरेलू उत्पादन बढ़ाने और आयात के नए रास्ते तलाश रही हैं। तेल कंपनियां आश्वासन दे रही हैं कि घरेलू सप्लाई स्थिर है।
आगरा का हाल
स्थानीय स्तर पर आगरा सबसे ज्यादा चिंतित है। वाणिज्यिक कमी ने घरेलू सप्लाई को भी चपेट में ले लिया। लोग एजेंसियों के चक्कर काट रहे हैं। कुछ जगहों पर घर बैठे डिलीवरी के नंबर जारी किए गए हैं। लेकिन जागरूकता की कमी से पैनिक रुक नहीं रहा। गृहिणियां सबसे ज्यादा परेशान हैं। रसोई ठंडी पड़ने का डर सताने लगा है।
यह संकट कब तक चलेगा, कहना मुश्किल है। लेकिन एक बात साफ है कि अफवाहें और जल्दबाजी से हालात बदतर हो रहे हैं। सरकार और जनता दोनों को संयम बरतना होगा। घरेलू उत्पादन बढ़े और आयात सुधरे तो राहत मिल सकती है। फिलहाल रसोई का इंतजार जारी है।











