मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव ने वैश्विक गैस आपूर्ति को बुरी तरह प्रभावित किया है। भारत में कमर्शियल एलपीजी सिलेंडरों की कमी से जूझ रही दिल्ली सरकार ने अब सख्त राशनिंग नीति लागू कर दी है। 19 किलो के नीले रंग के इन सिलेंडरों का दैनिक वितरण 20 प्रतिशत तक सीमित हो गया है। आवश्यक सेवाओं को प्राथमिकता देने के लिए आठ सेक्टरों की नई सूची तैयार की गई है। अस्पतालों से लेकर रेलवे तक पहले नंबर पर हैं जबकि होटल और रेस्तरां अंत में लाइन में खड़े हैं।

संकट की जड़ और तत्काल कदम
ईरान और इजरायल के बीच उग्र झड़पों ने समुद्री रास्तों पर पाबंदी लगा दी है। इससे आयातित एलपीजी का स्टॉक तेजी से घट रहा है। दिल्ली एनसीआर में वितरकों के बाहर लंबी कतारें लग रही हैं। जमाखोरी की शिकायतें बढ़ गई हैं। सरकार ने तुरंत आठ क्षेत्रों को चिन्हित किया ताकि जरूरी सेवाएं ठप न हों। सबसे ऊपर अस्पताल शैक्षणिक संस्थान रेलवे और हवाई अड्डे हैं जहां पूर्ण आपूर्ति सुनिश्चित होगी। इसके बाद सरकारी कैंटीनें आती हैं।
विस्तृत प्राथमिकता क्रम
तीसरे स्थान पर रेस्तरां और भोजनालय हैं जिन्हें करीब 42 प्रतिशत हिस्सा मिलेगा। चौथे नंबर पर होटल गेस्ट हाउस और हॉस्पिटैलिटी इकाइयां। पांचवें क्रम में डेयरी बेकरी तथा स्वीट शॉप्स। छठे स्थान पर कैटरर्स और बैंक्वेट हॉल। सातवें नंबर ड्राई क्लीनिंग तथा पैकेजिंग इकाइयां। सबसे आखिर में खेल सुविधाएं और स्टेडियम आते हैं। यह व्यवस्था तब तक चलेगी जब तक आपूर्ति पटरी पर न लौट आए।
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व्यापारियों की परेशानी और सरकारी उपाय
होटल मालिकों में भारी नाराजगी है। एक संघ अध्यक्ष ने बताया कि उनका कारोबार लड़खड़ा रहा है फिर भी आवश्यक सेवाओं को तरजीह सही ठहराई। सरकार ने पाइपलाइन गैस यानी पीएनजी तथा सीएनजी को बढ़ावा देने का आह्वान किया है। कालाबाजारी रोकने हेतु विशेष टीमें गठित की गई हैं। ऑनलाइन बुकिंग को प्रोत्साहन दिया जा रहा है। केंद्र स्तर पर एलपीजी उत्पादन बढ़ाने की कोशिशें तेज हैं।
भविष्य की राह
देश में कुल स्टॉक पर्याप्त बताया जा रहा है किंतु स्थानीय चुनौतियां बनी हुई हैं। यह नीति अन्य प्रभावित राज्यों के लिए उदाहरण बन सकती है। क्या अंतरराष्ट्रीय संकट लंबा खिंचेगा या जल्द सामान्य स्थिति बहाल होगी यह आने वाले दिनों में स्पष्ट होगा। उपभोक्ताओं को सलाह है कि वे धैर्य रखें और विकल्प तलाशें। दिल्ली सरकार लगातार स्थिति पर नजर रखे हुए है।











