
ई-कॉमर्स और होम डिलीवरी के इस दौर में अक्सर देखा जाता है कि सामान घर पहुँचाने वाला डिलीवरी एजेंट आपसे बिल राशि के ऊपर 20 से 50 रुपये की अतिरिक्त मांग करता है, खासकर रसोई गैस (LPG) की डिलीवरी के दौरान यह एक आम समस्या बन चुकी है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि कानूनन आप एक भी अतिरिक्त रुपया देने के लिए बाध्य नहीं हैं?
क्या कहता है नियम?
नियमों के मुताबिक, किसी भी सामान की होम डिलीवरी के लिए लगने वाला शुल्क पहले से ही आपके इनवॉइस (बिल) में शामिल होता है. ग्राहक केवल उसी राशि का भुगतान करने के लिए उत्तरदायी है जो बिल पर छपी है।
- गैस सिलेंडर: तेल कंपनियों के सख्त निर्देश हैं कि गैस एजेंसियां उपभोक्ताओं से डिलीवरी के नाम पर कोई अतिरिक्त टिप या कन्वेंस फीस नहीं मांग सकतीं। डिलीवरी शुल्क कंपनी द्वारा पहले ही एजेंट को दिया जाता है।
- फूड और पैकेजिंग चार्ज: हाल ही में उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि खाने के बिल के ऊपर मनमाना पैकेजिंग शुल्क लेना अनुचित व्यापार व्यवहार की श्रेणी में आता है।
- कैश ऑन डिलीवरी (COD): ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स द्वारा लगाए जाने वाले अतिरिक्त हैंडलिंग चार्जेस पर भी सरकार की कड़ी नज़र है।
जबरन पैसे मांगे जाने पर यहाँ करें शिकायत
यदि कोई डिलीवरी एजेंट आपसे अतिरिक्त पैसों की मांग करता है या पैसे न देने पर बदतमीजी करता है, तो आप नीचे दिए गए तरीकों से अपनी आवाज़ उठा सकते हैं:
- नेशनल कंज्यूमर हेल्पलाइन (NCH): उपभोक्ता अपनी शिकायत टोल-फ्री नंबर 1915 पर कॉल करके दर्ज करा सकते हैं। इसके अलावा 8800001915 पर WhatsApp संदेश के जरिए भी मदद ली जा सकती है।
- गैस कंपनियों की हेल्पलाइन: इंडेन (Indane) के ग्राहक 1800-2333-555 पर शिकायत कर सकते हैं। भारत गैस और एचपी के ग्राहक उनकी आधिकारिक वेबसाइट या ऐप के माध्यम से अपनी बात रख सकते हैं।
- पोर्टल पर ऑनलाइन शिकायत: आप consumerhelpline.gov.in पर जाकर सीधे अपनी शिकायत दर्ज करा सकते हैं।
डिजिटल पेमेंट है सबसे सुरक्षित रास्ता
विशेषज्ञों का मानना है कि इस ‘एक्स्ट्रा वसूली’ से बचने का सबसे आसान तरीका ऑनलाइन भुगतान (Digital Payment) है, जब आप पहले से ही भुगतान कर देते हैं, तो डिलीवरी के समय नकद लेनदेन का झंझट खत्म हो जाता है और एजेंट आपसे अतिरिक्त पैसों की मांग नहीं कर पाता।
अगली बार जब कोई डिलीवरी एजेंट आपसे ‘चाय-पानी’ या ‘किराये’ के नाम पर पैसे मांगे, तो डरे नहीं, उन्हें नियमों का हवाला दें और जरूरत पड़ने पर तुरंत हेल्पलाइन नंबरों का उपयोग करें। सतर्क नागरिक ही व्यवस्था में बदलाव ला सकता है।











